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अनुवाद और व्याकरण

अनुवाद   : भाषा का जन्म मनुष्य के बीच परस्पर विचार-विनिमय के लिए हुआ। मनुष्य जब तक एक सीमित दायरे में होता हfऔर उस छोटे से समुदाय के बीच ही उसका संवाद होता है, तब तक एक भाषा से उसका काम चल जाता है। किंतु, जैसे ही उसके संवाद क्षेत्र का विस्तार होता है, उसे भिन्न – भिन्न भाषा भाषियों से संपर्क करना पड़ता है। इन्हीं भिन्न समुदायों के साथ विचार- विनिमय के लिए किसी भाषा विशेष को दूसरी भाषाओं में रूपांतरित करने की आवश्यकता पड़ती है। भाषाओं का यह रूपांतरण ही अनुवाद है। ‘अनुवाद’ शब्द में ‘अनु’ उपसर्ग है, जिसका अर्थ है- ‘बाद में’ और ‘वाद’ भाववाचक संज्ञा है, जो वद् धातु में घञ् प्रत्यय जुड़ने से बनता है| वद् का अरथा है- बोलना या कहना तथा वाद का अर्थ है- कहने की क्रिया अथवा काही हुई बात| इस प्रकार अनुवाद का तात्पर्य है- किसी एक भाषा मेँ व्यक्त भावों और विचारों को फिर से दूसरी भाषा में कहना| प्रो. कृष्ण कुमार गोस्वामी ने आज के संदर्भ में अनुवाद को इस प्रकार परिभाषित किया है:  स्रोत भाषा में व्यक्त पाठ्य सामग्री का निकटतम समतुल्यता के आधार पर लक्ष्य भाषा में पुनर्सृजन करना अनुवाद है।  अर...